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उत्‍तर प्रदेश मे किए गये शोध के आधार पर

किसानोपयोगी संस्‍तुतियां
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    उत्‍तर प्रदेश मे स्‍थापित कृषि विश्‍वविद्यालयों एवं भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के शोध संस्‍थानों के द्वारा प्रदेश की विभिन्‍न कृषि जलवायुवीय परिस्थियों मे उगायी जाने वाली फसलों के किस्‍मों का विकास, फसल प्रणाली पर आधारित तकनीकी विकास, एकीकृत पोषक तत्‍व प्रबंधन, एकीकृत नाशीजीव प्रबंधन तथा कृषि यंत्रो के विकास पर शोध कार्य किया जा रहा है। वर्तमान में इन शोध के आधार पर की गयी किसानोपयोगी संस्‍तुतियों का सूक्ष्‍म विवरण निम्‍नवत है:-

उन्‍नतशील किस्‍मों का विकास

    प्रदेश के विभिन्‍न एग्रोक्‍लाइमेटिक जोन(कृषि जलवीय क्षेत्रों) में प्रचालित कापिंग सिस्‍टम (फसल प्रणाली) एवं विभिन्‍न दशाओं यथा सिंचित, असिंचित, शीघ्र एवं विलम्‍ब से बुआई, उपराऊ व नीची भूमियों आदि के लिए किस्‍मों का विकास किया गया है। फसलवार प्रमुख संस्‍तुतियों का विवरण निम्‍नवत है:-

bullet धान
bullet असिंचित दशा
शीघ्र पकने वाली साकेत 4, गोविंद 118, नरेन्‍द्र 80
bullet सिंचित दशा
शीघ्र पकने वाली साकेत 4, रत्‍ना, गोविंद
मध्‍यम देर से पकने वाली पन्‍त धान 10, पन्‍त धान 4, नरेन्‍द्र 359, पूसा 44   
देर से पकने वाली महसूरी, स्‍वर्णा, टाइप 9
सुगन्धित धान टाइप3, बासमती 370, पूसा बासमती1, हरियाणा बासमती1, कस्‍तुरी
उसरीली भूमि के लिए  ऊसर धान-1, ऊसर धान-2, सी0 एस0 आर0-10, सी0 एस0 आर0-13, साकेत-4
bullet निचले एवं भराव वाले क्षेत्रों में
30 सेमीं गहराई तक महसूरी, जललहरी, पंकज, स्‍वर्णा
30-50 सेमीं गहराई तक चकिया 59, मधुकर जल प्रिया
1 मीटर से अधिक गहराई तक जल निधि एवं जलमग्‍न।    
बाढ ग्रस्‍त क्षेत्रों के लिए चकिया 59, मधुकर एवं बाढ अवरोधी।   
bullet मक्‍का
bullet (अ) संकर मक्‍का
उत्‍तर प्रदेश के सम्‍पूर्ण मैदानी क्षेत्रों के लिए    गंगा-2, गंगा-11,
bullet (ब) संकुल मक्‍का
सम्‍पूर्ण उत्‍तर प्रदेश के संस्‍तुत तरूण, नवीन, कंचन, श्‍वेता, मा‍ही, प्रभात 
सम्‍पूर्ण मैदानी क्षेत्र डी0 765, सूर्या, आजाद उत्‍तम।
पश्चिमी उत्‍तर प्रदेश    नवज्‍योति।
bullet (स) देसी मक्‍का 
सम्‍पूर्ण उत्‍तर प्रदेश     सरताज, प्रकाश, दकन-107  
सम्‍पूर्ण मैदानी क्षेत्र मेरठपीली, जौनपुरी।   
पश्चिमी व मध्‍य मैदानी क्षेत्र   गौरव।
bullet बाजरा
(अ) संकर किस्‍में   पूसा 323, पूसा 23, आई0सी0एमएच0 451
(ब) संकुल किस्‍में आई0सी0एमबी0 155, डब्‍लू0सी075, आई0सी0टी0पी0-8203, राज171   
bullet ज्‍वार  
सम्‍पूर्ण उ0 प्र0 के लिए उपयुक्‍त संकुल एवं संकर     सी0 एस0 बी-13, सी0 एस0 बी-15, सी0 एस0 एच-16, सी0 एस0 एच-9, वर्षा (बुन्‍देलखण्‍ड को छोडकर)।  
बुन्‍देलखण्‍ड क्षेत्र के उपयुक्‍त   मऊ टा - 1, मऊ टा - 2,
bullet मूंगफली
सम्‍पूर्ण उ0 प्र0 के लिए उपयुक्‍त किस्‍में  
     
टा0 64, टा0 28, चन्‍द्रा, एच 13, चित्रा, कौशल, प्रकाश एवं अम्‍बर।
bullet सोयाबीन
सम्‍पूर्ण उ0 प्र0 के लिए उपयुक्‍त किस्‍में   पी0के0 472, पी0एस0564, पी0के0416, पी0के01024, पी0के0327, पूसा-16, पी0एस01042
बुन्‍देलखण्‍ड क्षेत्र के उपयुक्‍त किस्‍में       पी0के0 472, जे0एस0 72-44(गौरव)    
bullet तिल
सम्‍पूर्ण उ0 प्र0 के लिए टा - 78
मैदानी तथा बुन्‍देलखण्‍ड क्षेत्र के लिए टा - 4
मध्‍य एवं पश्चिमी क्षेत्र के लिए टा - 12
बुन्‍देलखण्‍ड क्षेत्र के लिए टा - 13
bullet अरहर
bullet (अ) अगेती किस्‍में    
सम्‍पूर्ण उ0 प्र0 के लिए टा - 21, यू0 पी0 ए0 एस0 -120, पूसा-9, आई0सी0पी0एल0 - 15
bullet (ब) देर से पकने वाली
सम्‍पूर्ण उ0 प्र0 के लिए  टाइप - 7, टाइप - 17, बहार, अमर, नरेन्‍द्र अरहर - 1 एवं आजाद।
bullet मूंग
सम्‍पूर्ण उ0 प्र0 के लिए उपयुक्‍त किस्‍में   टा0 44, पन्‍त मूंग 4  
पूर्वी उ0प्र0 पी0 डी0 एम0 54
सम्‍पूर्ण मैदानी क्षेत्र पन्‍त मूंग - 2
मैदानी क्षेत्र (पूर्वी उ0प्र0 को छोडकर) पन्‍त मूंग - 1
bullet उर्द
सम्‍पूर्ण उ0 प्र0 के लिए उपयुक्‍त किस्‍में   आजाद - 1, नरेन्‍द्र उर्द - 1, पन्‍त उर्द 35, आई0पी0यू0 94 -1
पूर्वी उ0प्र0 पन्‍त यू0 19
सम्‍पूर्ण मैदानी क्षेत्र टा0 9    
प्रदेश के मध्‍य पश्चिमी व बुन्‍देलखण्‍ड क्षेत्र के लिए टा0 27   
bullet गेहूं  
(अ) असिंचित दशा    कुल 26 किस्‍में संस्‍तुत हैं,जिनमें कुछ प्रमुख किस्‍में हैं सी0 306, के 78, राज 1555, यू0पी0 1109, इन्‍द्रा (के0 8962)।   
(ब) सिंचित दशा  (विलम्‍ब से बुवाई) कुल 26 किस्‍में संस्‍तुत हैं,जिनमें कुछ प्रमुख किस्‍में निम्‍न हैं - यू0पी02425, एच0 डी0 2285, राज 3077, मालवीय 234, त्रिवेणी (के0 8020), नरेन्‍द्र गेहूं 1014।    
(स) सिंचित दशा (समय से बुवाई)  कुल 11 किस्‍में संस्‍तुत हैं,जिनमें कुछ प्रमुख किस्‍में निम्‍न हैं - यू0पी02338, यू0पी02382, पी0बी0डब्‍लू 343,के0 88, के0 9107,  नरेन्‍द्र गेंहू 1014।
(द) उसरीली भूमि के लिए उपयुक्‍त किस्‍में के0आर0एल0 1-4, राज3077, लोक-1, जाब 666
bulletजौ
(अ)छिलकायुक्‍त प्रजातियॉं    ज्‍योति, अम्‍बर, विजया, आ‍जाद, के141, हरितिमा, प्रीति, जागृति, लखन, मंजुला व आरे एस06।    
(ब)छिलका रहित प्रजातियॉं गीतांजलि (के 1149)। 
(स)साल्‍ट तैयार करने के उपयुक्‍त प्रजातियॉं प्रगति, ऋतुभरा, अल्‍का 93, डी0 एल0 88, व रेखा का विकास किया गया है। 
bullet तोरिया
टी0 36, टी0 9, भवानी, पी0टी0 30, एवं पी0टी0 507
bulletराई सरसो 
राई वरूणा (टाइप 56), राहणी, कान्ति, वरदान, वैभव, नरेन्‍द्र राई8501, किरन, हमौला 401 (गोभी सरसों), उर्वसी, (संकर किस्‍म)।   
bullet अलसी    
नीलम, टी0 - 397, गरिमा, लक्ष्‍मी 27, श्‍वेता, शुभ्रा, गौरव, शिखा एवं पदमिनी
bulletकुसुम
के0 65 व मालवीय 305    
bulletचना
bullet (अ) देशी
bullet समय से बुवाई हेतु संस्‍तुत किस्‍में
सम्‍पूर्ण उ0 प्र0 के लिए उपयोगी किस्‍में   अवरोधी, पन्‍त जी 114, पूसा 256, के0 जी0 डी0 1168
सम्‍पूर्ण मैदानी क्षेत्र के लिए उपयोगी किस्‍में     के0 850
bullet प्रदेश के पूर्वी असिंचित क्षेत्रों, बुन्‍देलखण्‍ड क्षेत्र एवं देर से बोने के लिए उपयुक्‍त किस्‍म - राधेo
बुन्‍देलखण्‍ड क्षेत्र के लिए उपयुक्‍त किस्‍म जे0 जी0 315   
bullet विलम्‍ब में बुवाई हेतु संस्‍तुत किस्‍में
सम्‍पूर्ण उ0 प्र0 के लिए उपयोगी किस्‍में   उदय, पन्‍तजी 186, पूसा 256, पी0डी0जी0 84-10 (मिश्रित खेती के लिए)।
bullet(ब) काबुली
bullet सदाबहार, एल0- 550, पूसा - 267
bulletमटर
सम्‍पूर्ण उ0प्र0 के मैदानी क्षेत्रों के लिए किस्‍में   रचना, पन्‍त मटर - 5, मालवीय मटर - 2, के0एफ0पी0डी0 103, अपर्णा, के0पी0 एफ0 आर0 - 144 - 1 (सपना), स्‍वाती एवं मालवीय 15  
बुन्‍देलखण्‍ड क्षेत्र जे0 पी0 885   
bulletमसूर
सम्‍पूर्ण उ0प्र0 के मैदानी क्षेत्रों के लिए किस्‍में   एल0 4076, पन्‍त मसूर 639, पन्‍त मसूर 406, पन्‍त मसूर 234, मलिका (के0 75), नरेन्‍द्र मसूर 1, डी0पी0एल0 62, पन्‍त मसूर - 5
उ0प्र0 के मैदानी क्षेत्रों के लिए किस्‍में     पन्‍त मसूर - 4, डी0पी0एल0 15,(प्रिया)। 
बुन्‍देलखण्‍ड क्षेत्र के लिए किस्‍में     आई0पी0एल0 - 81 एवं डी0पी0एल0 15,(प्रिया)।
bulletआलू
संस्‍तुत प्रमुख किस्‍में कुफरी चन्‍द्रमुखी, कुफरी अलंकार, कुफरी बादशाह
bullet गन्‍ना
संस्‍तुत प्रमुख किस्‍में   को- 1158, बी0ओ0 91, को0शा0 पंत 90223, को0शा0 767, को0शा0 802, को0शा0 95555, को0शा0 8412

 

उ0प्र0 भूमि सुधार परियोजना के अन्‍तर्गत अनुकरणीय शोध कार्यक्रम

के आधार पर की गई संस्‍तुतियां

*    ऊसर भूमि के प्रभावी सुधार व अधिकतम पैदावार के लिए सर्वोत्‍तम फसल पद्धति धान- सरसा- हरी खाद व धान-गेंहूं- हरी खाद ऊसर प्रभावित क्षेत्रों में अपनाई जानी चाहिए।

*    ऊसर भूमि सुधार के लिए सर्वोत्‍तम भूमि सुधारक जिप्‍सम 25 प्रतिशत, गोबर की खाद 10 टन प्रति है0 की दर से उपचारित करके धान गेंहूं फसल, पद्धति अधिक लाभदायक है।

*    भूमि में रोपित आंवला, अमरूद फसल पद्धति में अधिकतम पौध वृद्धि एवं फसल हेतु टपक सिंचाई विधि द्धारा 26 लीटर पानी पौंधा तीन दिन के अन्‍तराल पर देना काफी उपयोगी है।

*   भूमि में रोपित आंवला की फसल में टपक सिंचाई के साथ गोबर की खाद व धान के पुलाव का आवरण करने से पौधों की वृद्धि अच्‍छी होती है और खरपतवारों की संख्‍या में कमी रहती है।

*   ऊसर भूमि में रोपित फल वृक्ष आंवला, अमरूद में अधिक नमी कायम रखने हेतु बिना सिंचाई बिना सिंचाई के गन्‍ने पत्‍ती का आवरण पौधों की अच्‍छी बढ़वार हेतु उपयोगी है।

*   ऊसर भूमि में 50 प्रतिशत जिप्‍सम से उपचारित करके, अधिक आमदनी एवं भूमि सुधार लेमन ग्रास एवं खस सबसे उपयोगी सगन्‍धूय फसलें हैं।

*   ऊसर भूमि में रोपित फल वृक्ष आंवला के अन्‍तर्गत वेटीवर व मैट्रीकेरियर (जर्मन कैमोमिला), अन्‍तराशस्‍य फसलों के रूप में अधिक आमदनी देने वाली सुधन्‍धमय फसलें है।

*   वानकी पौधों के साथ चारा के अन्‍तराशस्‍य के रूप में पैरा घास सर्वोत्‍तम फसल पद्धति हैं।

*   फल वृक्ष फसलों में आंवला किस्‍म नरेन्‍द्र आंवला 10, नरेन्‍द्र आंवला 7, व चकैया सबसे अधिक क्षारीय सहनशील किस्‍में हैं।

*   सब्जियों की किस्‍मों में सबसे अधिक क्षारीय सहनशील क्षमता वाली किस्‍में, मिर्चसी1, पूसा ज्‍वाला, सूर्यमुखी, सौफ यू0एफ0 114, बैगन पन्‍त रितुराज तथा टमाटर एन0डी0टी0 44- 1, एन0डी0- 3, एन0डी0टी0- 11 तथा पूसा रूबी हैं। मथ्‍यम सहनशील किस्‍मों में बैगन एन0 डी0 बी0 - 15, एन0 डी0 बी0 26 - 1, के0टी0 - 3 तथा मूली - जापानी सफेद एवं पूसा चेतकी पाई गई।

एकीकृत नाशीजीव प्रबन्‍धन

    उ0प्र0 कृषि विविधीकरण के अन्‍तर्गत प्रदेश के कृषि विश्‍वविद्यालयों में कम से कम कीट फफूंद/खरनाशी दवाओं का प्रयोग करके कृषि की उत्‍पादकता में टिकाऊ वृद्धि लाने के लिए एकीकृत नशशीजीव प्रबंधन (आई0पी0एम0) पर शोध कार्य किया जा रहा है। इस कार्यक्रय के मुख्‍य अंग बायो-एजेन्‍ट का उत्‍पादन एवं उनके प्रयोग परप्रशिक्षण देना है। इस कार्यक्रम में किये गये प्रदर्शनों से न केवल रासायनिक दवाओं के प्रयोग में कमी आई है बल्कि गुणवत्‍तापरक उत्‍पाद के उत्‍पादन में वृद्धि हुई है तथा प्रदूषण कम हुआ है।

एकीकृत नाशीजीव प्रबन्‍धन से संबंधित संस्‍तुतियॉं निम्‍नवत् हैं :-

bullet समस्‍याओं के निदान के लिये केवल एक तरीके को अपनाने के बजाय कई साधनों का समन्‍वय किया जाय, जैसे अवरोधी किस्‍मों का प्रयोग एवं अन्‍य शस्‍य क्रियाओं, तकनीकी साधन, जैविक साधनों और रसायनों का प्रयोग आदि।
bullet गर्मी में गहरी जुताई करके फसलों एवं खरपतवारों के अवशेष को नष्‍ट कर देना जिससे कीट/रोग के अवशेष उन्‍हीं के साथ नष्‍ट हो जायें और उनकी वृद्धि पर नियंत्रण पाया जा सके।
bullet समुचित फसल चक्र अपनाया जाना।
bullet फसल के प्रतिरोधी प्रजातियों के मानक बीजों की बुवाई करना।
bullet हमेशा बीज को शोधित करके बोना।
bullet बुवाई समय से व एकसार की जाय, पौधों से पौधों की वांछित दूरी बनायी रखी जाय।
bullet उर्वरकों का संतुलित उपयोग किया जाय।
bullet समुचित जल प्रबन्‍ध अपनाया  जाये।
bullet निराई गुडाई करके समय से खरपतवार को नष्‍ट करते रहें।
bullet सर्वेक्षण द्वारा नाशीजीव एवं उनके प्राकृतिक शत्रुओं पर बराबर निगाह रखी जाय और यदि नाशजीव प्राकृतिक शत्रु से बराबर अधिक मात्रा में हों तभी रासायनिक उपचार अपनाया जाय।
bullet नाशीजीव के अण्‍डे समूह एवं इल्लियों को प्रारम्भिक अवस्‍था में नष्‍ट करते रहें।
bullet प्रकाश/फेरोमैन ट्रैप का उपयोग करके नाशीजीव के प्रौढ को नष्‍ट किया जाय।
bullet नाशीजीव के प्राकृतिक शत्रुओं की  संख्‍या में वृद्धि करने के लिये उन्‍हें बाहर से लाकर खेतों में छोड़ा जाय।

 

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