WB01045_2.GIF (634 bytes) प्रगति एवं कार्यक्रम WB01045_2.GIF (634 bytes)

उत्‍तर प्रदेश में कृषि मण्डियों के विकास पर एक दृष्टि

        मण्‍डी विकास के बिना कृषि विकास सम्‍भव नहीं है। अत: वर्ष 1964 में उ0प्र0 कृषि उत्‍पादन मण्‍डली अधिनियम पारित किया गया ताकि परम्‍परागत कृषि मण्डियों में व्‍याप्‍त कुरीतियों, गैर कानूनी कटौतियों और बिचौलियों के अनुचित प्रभाव को समाप्‍त कर कृषि विपणन की स्‍वस्‍थ परम्‍पराओं की स्‍थापना की जा सकेा इस अधिनियम के अन्‍तर्गत विनियमित मण्डियों के गठन का कार्य प्रारम्‍भ किकया गयाा वर्ष 1956-66 तक प्रदेश में विनियमित (Regulated Market) मण्डियों की संख्‍या मात्र 02 थी, जो अब बढकर 265 हो गई है। इनके साथ 382 उपमण्डियां भी सम्‍बद्ध हैं। अब समग्र प्रदेश विनियमन के अन्‍तर्गत आ चुका है।    

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 मण्‍डी विनियमन

       मण्डियों में कृषि उपज के क्रय-विक्रय की कुल प्रक्रिया को नियमबद्ध कर देना ही मण्‍डी विनियमन है। इस व्‍यवस्‍था के अन्‍तर्गत बिक्री योग्‍य कृषि जिन्‍सों की छनाई-सफाई और वर्गीकरण कराते हुए नीलामी द्धारा बिक्री करायी जाती है। विक्रेता किसान की सहमति से ही सौदा तय होता था तथा मीट्रिक प्रणाली से ही सभी नाप माप-तौल करा करके किसानों को कुल मूल्‍य का भुगतान तुरन्‍त कराया जाता है। विनियमन के फलस्‍वरूप करदा, गरदा, धर्माद, गौशाला, पौशाला जैसे नामों से हाने वाली परम्‍परागत कटौतियों को गैरकानूनी घोषित किया गया है। इस प्रकार कृषि मण्डियों में किसानों को कृषि उपज का उचित मूल्‍य दिलाना एवं उन्‍हें न्‍यायोचित व्‍यावहार सुलभ कराना सुनिश्चित किया जाता है। इन नियमों के उल्‍लघंन करने पर मण्‍डी अधिनियम के अन्‍तर्गत कडे दण्‍ड की व्‍यवस्‍था है। मण्‍डी विनियम को प्रभावी बनाने हेतु कृषि उपज के क्रय-विक्रय में लगे संवर्गो के लिये मण्‍डी समितियों द्वारा अनेक प्रकार की आवश्‍यक सुख-सुविधाएं उपलब्‍ध करायी जाती हैं तथा विकास एवं कल्‍याण की विविध योजनाएं भी कार्यान्वित की जाती है।

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मण्‍डी समिति 

    प्रत्‍येक मण्‍डी क्षेत्र के लिये मण्‍डी समिति की स्‍थापना की गयी है। मण्‍डी समिति के मुख्‍य कर्तव्‍य एवं दायित्‍व इस प्रकार है :-

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किसानों और व्‍यापारियों के बीच न्‍यायपूर्ण व्‍यवहार सुनिश्‍चत करना।

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बिक्री योग्‍य कृषि -उपज का वर्गीकरण तथा नीलामी द्वारा बिक्री कराना।

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मीट्रिक प्रणाली से सही माप-तौल की व्‍यवस्‍था कराते हुये विक्री हुयी उपज का तुरन्‍त भुगतान कराना।

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बाजार भावों तथा अन्‍य उपयोगी सूचनाओं का संग्रह और प्रचार-प्रसार करना।

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मण्‍डी स्‍थलों में आवश्‍यक सुख-सुविधाओं की व्‍यवस्‍था सुनिश्चित करना।

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व्‍यापारियों तथा कृषकों के बीच विवाद या मतभेद होने पर मध्‍यस्‍थ की भूमिका निभाना तथा उनका निराकरण करना।

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मण्‍डी स्‍थलों के निर्माणार्थ भूमि अर्जन करना तथा निर्माण कार्यो के नक्‍शे तैयार करने के साथ-साथ आय व व्‍यय का विधिवत लेखा-जोखा रखना।

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मण्‍डी परिषद

    मण्‍डी समितियों के कार्य संचालन तथा उनकी विकास योजनाओं की निगरानी, नियंत्रण और मार्गदर्शन के लिये वर्ष 1973 में प्रदेश स्‍तर पर ''राज्‍य कृषि उत्‍पादन मण्‍डी परिषद'' की स्‍थापना की गयी। मण्‍डी परिषद के कुशल नेतृत्‍व में मण्‍डी समितियों ने अधिनियम के प्राविधानों को प्रभावी ढंग से लागू कर कृषि मण्डियों में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभाई है। फलस्‍वरूप विनियमित मण्डियों की आवक और आय में उत्‍तरोत्‍तर वृद्धि होती गयी। कृषि वर्ष 1972-73 में प्रदेश की मण्डियों की कुल आवक 37.90 लाख मी0 टन थी, जो प्रतिवर्ष बढ्ते हुये वर्ष 1999-2000 में 273.95लाख मी0 टन हो गयी है। इस प्रकार समस्‍त मण्डियों की कुल आय वर्ष 1972-73 में रू0 1.92 करोड थी, जो कृषि वर्ष  1999-2000 में 273.33 करोड हो गयी है।

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वरदान स्‍वरूप मण्‍डी परिषद की कल्‍याणकारी योजनाएं

    किसानों के हित में मण्‍डी परिषद प्रहरी के रूप में तत्‍परता के साथ संलग्‍न है। यही कारण है कि किसान भाईयों को उनके उत्‍पाद का अधिक से अधिक मूल्‍य दिलाने के लिये तथा उन्‍हें शोषण से बचाने के लिये कुशल प्रबन्‍धन द्वारा कल्‍याणकारी कदम उठाये जा रहे है, जिसके अन्‍तर्गत नवीन मण्‍डी स्‍थलों के निर्माण तथा मण्‍डी क्षेत्रों में विकास कार्यक्रमों के साथ-साथ किसानों के हित को ध्‍यान में रखते हुये मण्‍डी परिषद द्वारा कल्‍याणकारी योजनाएं भी चलाई जा रही हैं। कुछ प्रमुख योजनाएं इस प्रकार है :-   

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मण्‍डी स्‍थलों एवं सम्‍पर्क मार्गो का निमार्ण 

    मण्‍डी परिषद द्वारा अब तक 196 मुख्‍य मंडी, 75 उपमण्‍डी स्‍थल, 59 फल-सब्‍जी मण्‍डी स्‍थल, 5 मत्‍स्‍य बाजार एवं 168 हाट-पैठों का निर्माण कराया जा चुका है।

    किसी भी मौसम में किसान भाई वर्ष भर अपने उत्‍पाद को मण्‍डी में ले जा सके, नाप-तौल की गडबडियों से बच सके तथा बिचौलियों के शोषण से मुक्‍त हो सकें इस दृष्टिकोण से गावों को मण्डियों से जोडने के लिये सम्‍पर्क मार्गो का निर्माण कराया जा रहा है। अब तक मण्‍डी परिषद के द्वारा 6256 किमी0 पक्‍की सडके एवं 8192 नग पुलियों का निर्माण करा करके लगभग 8500 गावों को लेपनयुक्‍त मार्ग की सुविधा दी गयी है।

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स्‍वच्‍छ पेयजल योजना

    गसचसें में, मण्‍डी स्‍थलों तथा ग्रामीण बाजारों में जहां किसान भाई खरीद-फरोख्‍त के लिए एकत्रित होते हैं वहां मण्‍डी परिषद के द्वारा स्‍वच्‍छ पेयजल उपलब्‍ध कराने के लिये इण्डिया मार्क-2 हैण्‍डपम्‍प स्‍थापित कराये गये है। अब तक पूरे प्रदेश में लगभग 18.500 हैण्‍डपक्‍प मण्‍डी परिषद के द्वारा स्‍थापित हो चुके है। इस प्रकार मण्‍डी परिष्‍ज्ञद के द्वारा अब तक लगभग एक करोड व्‍यक्तियों को स्‍वच्‍छ पेयजल की सुविधा उपलब्‍ध करायी गयी है।   

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सामूहिक जनता व्‍यक्तिगत दुर्घटना सहायता योजना   

   उ0प्र0 के अधिसूचित मण्‍डी क्षेत्रों के किसानों, खेतिहार मजदूरों तथा मण्‍डी समिति/परिषद के मजदूरों को कृषि कार्य करते समय दुर्घटना ग्रस्‍त होने पर अथवा मृत्‍यु होने पर उसकी क्षतिपूर्ति हेतु मण्‍डी परिषद द्वारा जिलाधिकारियों के माध्‍यम से इस योजना को संचालित किया जा रहा है। दुर्घटना द्वारा मृत्‍यु होने पर अधिकतम रूपये 25,000/- तथा शारीरिक क्षति होने पर न्‍यूनतम रूपये 750/- दिये जा रह हैं।

    इस योजना का लाभ प्रदेश के उन किसानों, मजदूरों को जिनकी उम्र 18 से 60 वर्ष के माध्‍य हो तथा जो विगत दो वर्षो से उत्‍तर प्रदेश में स्‍थायी रूप से रह रहें हों, को सुलभ है।    

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खलिहान अग्नि दुर्घटना सहायता योजना   

    कभी-कभी ऐसी स्थिति उत्‍पन्‍न हो जाती है कि प्राकृतिक आपदा अर्थात हवा, यंत्रीकरण, मानवीय भूल के कारण खलिहान में आग लग जाती है और क्षण भर में कठोर परिश्रम से उत्‍पन्‍न किया गया। अन्‍न जल कर राख हो जाता है। ऐसी स्थिति में मण्‍डी परिषद द्वारा किसानों को आर्थिक सहायता देने के उददेश्‍य से खलिहान अग्नि दुर्घटना सहायता योजना जिलाधिकारियों के माध्‍यम से चलायी जा रही है। यह योजना जिलाधिकारियों के माध्‍यम से उददेश्‍य से चलायी जा रही है कि प्रभावित व्‍यक्तियों को तत्‍काल ही सहायता मिल सके और वे लोग भाग-दौड से बच सकें।

    इस योजना के अन्‍तर्गत जोत सीमा के आधार पर न्‍यूनतम रू0 3000/- तथा अधिकतम रू0 6000/- की आर्थिक सहायता उपलब्‍ध करायी जा रही है। इन योजनाओं के अन्‍तर्गत किसान भाइयों को कुछ भी व्‍यय नहीं करना पडता है। इस संबंध में विशेष जानकारी हेतु प्रभावित व्‍यक्तियों को चाहिए कि वे अपने क्षेत्र के मण्‍डी सचिव अथवा सभापति से सम्‍पर्क करें।   

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बखारी वितरण योजना   

    कृषि उपज के समुचित भण्‍डारण हेतु मण्‍डी परिषद ने किसानों के लिए बखारी वितरण योजना लागू की है। इसके अन्‍तर्गत दो, तीन तथा पांच कुन्‍तल बखारियों पर 33.33 प्रतिशत तथा 10 कुन्‍तल क्षमता की बखारियों पर 25 प्रतिशत अनुान किसानों को दिया जा रहा है।

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छात्रवृत्ति योजना

    किसानों के प्रतिभावान बच्‍चें जो कृषि की उच्‍च शिक्षा ले रहे हैं और रोजगारपरक शिक्षा सहित जो भविष्‍य में कृषि को अपने विशेष ज्ञान का लाभ देंगे, उन्‍हें सम्‍पूर्ण स्‍नातक तथा स्‍नातकोत्‍तर अध्‍ययन हेतु प्रदेश के 03 कृषि विश्‍वविद्यालयों, 2 कृषि संस्‍थानों तथा 23 महाविद्यालयों में कृषि शिक्षा को प्रोत्‍साहित करने के उद्देश्‍य से मण्‍डी परिषद द्वारा छात्रवृत्ति उपलब्‍ध करायी जा रही है। प्रत्‍येक कृषि विश्‍वविद्यालय स्‍तर पर 25 छात्रों को रू0 1000/-प्रतिमाह की दर से तथा प्रत्‍येक कृषि महाविद्यालय पर 11 छात्रों को रू0 800/- प्रतिमाह के हिसाब से छात्रवृत्ति प्रदान की जा रही है।   

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नीलामी द्वारा बिक्री पर बल देने के साथ किसानों की दी जाने वाली नि:शुल्‍क सुविधायें

    किसानों के उत्‍पाद का उचित मूल्‍य दिलाने के उद्देश्‍य से मण्डियों में नीलामी की व्‍यवस्‍था पर बल दिया जा रहा है और उसके माध्‍यम से किसानों को उनके उत्‍पाद का उचित मूल्‍य दिलाने हेतु अपनी कटिबद्वता दोहरायी जा रही है, जिससे किसानों को भविष्‍य में अपना जीवन स्‍तर बेहतर बनाने एवं अपना उत्‍पादन बढाने का प्रोजेक्ट मिले।   

    अपने उत्‍पाद का उचित मूल्‍य प्राप्‍त करने हेतु किसान भाई मण्डियों की ओर ज्‍यादा से ज्‍यादा आकृषित हों- इसके लिये उन्‍हें ठहरने के लिए नि:शुल्‍क विश्रामगृह , पशुओं को बांधने, पानी पिलाने एवं चारा खिलाने के लिए सुरक्षित व्‍यवस्‍था तथा बैंक, डाकघर व सुरक्षा के लिए पुलिस चौकियों की भी व्‍यवस्‍था कर दी गयी है। मण्‍डी समितियों में किसान भाइयों की सुविधा  के लिए तथा सही माप-तौल के लिए इलेक्‍ट्रानिक वे बिज (धर्मकांटे) और छनाई-सफाई आदि के लिए मैकेनिकल हैण्‍डलिंग यूनिटें तथा आलू के उत्‍पाद वाले ग्रेडर की भी सुविधा उपलब्‍ध करायी गयी है।   

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हाई मास्‍ट की स्‍थापना

   किसान भाइयों को रात्रि में विपणन संबंधी सुविधाओं को ध्‍यान में रखकर मण्‍डी परिषद के द्वारा फल, सब्‍जी-मण्‍डियों के अतिरिक्‍त अन्‍य विशिष्‍ट मण्‍डियों में तीस मीटर की ची हाई मास्‍ट की लाइट लगाने का कार्य वर्ष 1995-96 से प्रारम्‍भ किया गया है। इस हाई मास्‍ट में लगभग 80 मीटर की परिधि में प्रकाश उपलब्‍ध होता है। इस प्रकार अब तक 25 मण्‍डियों में 57 हाई मास्‍ट लगाकर प्रकाश की व्‍यवस्‍था की जा चुकी है तथा मण्डियों में हाई मास्‍ट लगाने का कार्य प्रगति पर है। 

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कृषक हैल्‍पलाइन

      मण्‍डी परिषद में अपने तैतिक प्रकृति के कार्यो से हटकर एक ऐसी योजना का शुभारम्‍भ किया है जो कृषिकों के हित में सीधी जुडी हुयी है। यह योजना पूरे देश में अपने में अलग है क्‍योंकि यह टाल फ्री काल पर आधारित है। प्रतिदिन 1.00 बजे से 3.00 बजे के माध्‍य दूरभाष सं0 160035122 पर प्रदेश के किसी किसान भाइयों द्वारा कृषि विश्‍वविद्यालय द्वारा तैनात किये गये कृषि वैज्ञानिकों से समुचित जवाब प्राप्‍त होंगे। योजना का कार्य क्षेत्र कुल छ: मण्‍डलों आगरा, झांसी, कानपुर, चित्रकूटधाम, इलाहाबाद तथा लखन होगा जिसमें 30 जनपदो के कुल 34 हजार गांव लाभाविन्‍त होंगे।  

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मण्डियों में आधुनिकीकरण का सूत्रपात एवं भविष्‍य की योजनाएं

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कम्‍प्‍यूटरीकृत व्‍यवस्‍था

    प्रदेश में स्थित विभिन्‍न मण्‍डी समितियों में प्रचालित बाजार भाव की जानकारी व्‍यापारियों तथा किसान भाईयों को तुरन्‍त उपलब्‍ध कराये जाने के उद्देश्‍य से कम्‍प्‍यूटर सुविधा का प्रयोग किये जाने का निर्णय लिया गया है। प्रथम चरण में प्रदेश की बडी मण्डियों में कम्‍प्‍यूटर उपलब्‍ध कराकर इन्‍टरनेट से जोडते हुए एक वेबसाइट बनवाया जा रहा है,जिसमें कोई भी उपभोकत वेबसाइट में मण्‍डी परिषद/ मण्‍डी समितियों से संबंधित महत्‍वपूर्ण जानकारियां उपलब्‍ध रहेंगी। इस व्‍यवस्‍था से व्‍यापारियों, किसानों के अतिरिक्‍त निर्यातकों को भी बहुत सी सुविधा मिलेगी। यह सुविधा लखन, कानपुर, झांसी, आगरा, मेरठ, बरेली, फैजाबाद, गोरखपुर तथा वाराणसी मण्डियों में प्रारम्‍भ कराने की तैयारी की जा चुकी है। मण्‍डी समितियों में कम्‍प्‍यूटर उपलब्‍ध हो जाने से उनकी प्रगति का ''आनटाइम'' अनुश्रवण करने में सुविधा होगी तथा सम्‍पूर्ण प्रदेश की सूचनायें अल्‍प समय में मुख्‍यालय को प्राप्‍त हो जायेगी। वेबसाइट द्वारा इन्‍टनेट के माध्‍यम से पूरे विश्‍व के कृषि उत्‍पाद के बाजार भाव को किसी भी समय प्राप्‍त किया जा सकता है। निश्‍चय ही यह व्‍यवस्‍था मण्‍डी समितियों की कार्य प्रणाली में एक नये युग का सूत्रपात करेगी।

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प्रत्‍येक तहसील में मण्‍डी निर्माण की योजना

   कृषि नीति के अन्‍तर्गत प्रत्‍येक तहसील क्षेत्र में कम से कम एक मण्‍डी स्‍थल के निर्माण की योजना रखी गयी है।प्रदेश मे कुल 350 तहसीलों में से 164 तहसीलों में मण्‍डी स्‍थल पहले से ही निर्मित है। शेष 186 तहसीलो मे से 79 तहसीलों में मण्‍डी स्‍थल घोषित करने की आवश्‍यकता पडेगी। किसान भाईयों को मण्‍डी तक पहुंचने हेतु कम दूरी तय करना पडे इस दृष्टिकोण से 10 किमी0 की दूरी पर मण्‍डी बनाने का सकारात्‍मक योजना बनायी जा रही है।

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मण्‍डी समितियों द्वारा 365 ग्रामों को गोद लेकर आदर्श मण्‍डी ग्राम के रूप में सवांगीण विकास की योजना 

    भारत ग्रामों में बसता है अतएव इस तथ्‍य को स्‍वीकारते हुए ग्रामों के विकास की परिकल्‍पना को साकार करने के लिए मण्‍डी परिषद द्वारा प्रदेश में प्रतिदिन एक ग्राम का सवांगीण विकास करने का लक्ष्‍य लेकर प्रत्‍येक मण्‍डी क्षेृ में एक ग्राम गोद लेकर उसके तीन वर्षो में सवांगीण विकास की योजना तैयार की गयी है और प्रत्‍येक चयनित ग्राम के विकास पर रू0 5.00लाख व्‍यय किये जाने का प्राविधान किया गया है। इस प्रकार इस योजना के अन्‍तर्गत प्रतिवर्ष 365 ग्रामों का चयन किया जायेगा और उनमें आवश्‍यक विकास कार्य यथा खडंजा, सडक, नाली एवं पीने के पानी की समुचित व्‍यवस्‍था कराने की योजना मण्‍डी परिषद से क्रियान्‍वित करायी जायेगी। साथ ही अन्‍य संबंधित विभागों के सहयोग से सम्‍पूर्ण शिक्षा, पशु चिकित्‍सा, विद्युत, सौर उर्जा आदि का प्रबंधन कराया जाएगा। इस प्रकार प्रदेश के 365 ग्रामों के विकास पर प्रतिवर्ष मण्‍डी परिषद द्वारा रू0 18.25 करोड एवं तीन वर्षो में कुल रू0 55;00 करोड व्‍यय किया जाएगा।   

 

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