प्रदेश में वर्तमान में निम्‍न चार कृषि एवं प्रोद्योगिकी विश्‍वविद्यालय कार्यरत हैं।

 

क्रं0

कृषि विश्‍वविद्यालय का नाम

स्‍थापना वर्ष

कार्य क्षेत्र (मण्‍डल)

1

2

3

4

1

चन्‍द्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्यौगिक विश्‍वविद्यालय,  कानपुर

1975

 झांसी, लखनऊ, कानपुर, चित्र‍कुटधाम

2

नरेन्‍द्र देव कृषि एवं प्रौद्यौगिक विश्‍वविद्यालय,कुमारगंज, फैजाबाद  

1975

वाराणसी,, आजमगढ़, गोरखपुर, बस्‍ती, देवीपाटन, फैजाबाद 

3

इलाहाबाद एग्रीकल्‍चर डीम्‍ड यूनीवर्सिटी, नैनी इलाहाबाद

1999

इलाहाबाद, मिर्जापुर

4

सरदार बल्‍लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्यौगिक विश्‍वविद्यालय, मोदीपुर, मेरठ

2000

मेरठ, सहारनपुर ,आगरा

      चूंकि सरदार बल्‍लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्यौगिक विश्‍वविद्यालय, मोदीपुरम, मेरठ एवं इलाहाबाद एग्रीकल्‍चर डीम्‍ड यूनीवर्सिटी, नैनी इलाहाबाद की स्‍थापना अभी हाल ही मे हुई है, अत: इनकी प्रगति प्रतीक्षित है।

प्रदेश में स्‍थापित कृषि विश्‍वविद्यालयों के उद्देश्‍य

    1. कृषि विज्ञान की विभिन्‍न विधाओं विशेषकर खेतीबाडी, ग्रामीण विकास, ग्रामीण उद्योग तथा व्‍यापार एवं अन्‍य संबंधित विषयों में उच्‍च शिक्षा प्रदान करना।

    2. कृषि एवं संबंधित विषयों पर शोध तथा प्रावैधिकी का विस्‍तार।

    3. कृषकों/ग्रामवासियों को जागरूक तथा शि‍क्षित बनाने के लिये प्रसार शिक्षा कार्यक्रम।  

प्रदेश के कृषि विश्‍वविद्यालयों की उपलब्धियां कृषि अनुसंधान

    अ.    चन्‍द्रशेखर आजाद कृषि विश्‍वविद्यालय, कानपुर

(1) गेंहूं की 1, जौ की 5, राई की3, अलसी की 5, मूंगफली की 3, मटर की 2 तथा मसूर, मूंग, कपास, ज्‍वार, मक्‍का, एवं धान की एक एक एवं सांवां, कुसुम आदि की कुल सात प्रजातियां विकसित की गई।

(2) शाकभाजी की उन्‍नत प्रजातियों के विकास में महत्‍वपूर्ण योगदान दिया गया जिसमें टमाटर, बैगन, मिर्च आदि की किस्‍में अत्‍यधिक लोकप्रिय है।

(3) पशुपालन के अन्‍तर्गत वीर्य को अधिक समय तक सुरक्षित रखने में ट्रिस एवं दुग्‍ध मिश्रित तकनी‍की से 2.5 प्रतिशत अधिक तेल प्राप्‍त घोल उपयोगी पाया गया।  

(4) आंवला, बेर तथा जामुन के फल वृक्षों का रोपण ऊसर भूमि में उपयोगी पाया गया जबकि वानिकी प्रजातियों मे शीशम तथा नीम ऐसी भूमियों हेतु उपयोगी पायी गई।  

(5) सरसों की फसल की बोआई सितम्‍बर के अन्तिम सप्‍ताह से अक्‍टूबर के प्रथम सप्‍ताह तक फसल को माहूं एवं सफेद गेरूई (व्‍हाइटरस्‍ट) के प्रकोप से बचाया जा सकता है।

   ब.    नरेन्‍द्र देव कृषि विश्‍वविद्यालय, कुमारगंज, फैजाबाद

(1) गहरे पानी तथा उथले पानी हेतु उपयुक्‍त धान की अधिक उत्‍पादन देने वाली किस्‍मों का विकास किया गया। इसके अतिरिक्‍त धान की अतिशीघ्र, शीघ्र एवं मध्‍यम अवधि में पकने वाली किस्‍में भी विकसित की गयी हैं।

(2) धान में अतिशीघ्र गेंहूं, राई जौ, मटर, बैगन, अरबी, खरबूजा, बेल, आंवला, महुआ, कटहल, एवं जूट की भी उन्‍नत किस्‍में विकसित की गयी हैं।

(3) ऊसर त‍था समस्‍याग्रस्‍त भूमि में आंवला, बैर तथा बेल की खेती के लिए विकसित किस्‍में केवल उ0प्र0 मे ही नही अपितु पूरे देश में लोकप्रिय हुई हैं।

(4) जर्मन कैमौमाइल, खस तथा लेमन घास को ऊसर भूमि में फल वृक्षों के बीच फसल के रूप में आसानी से उगाया जा सकता है।

(5) औषधि एवं सुगंध पौधों की खेती में विकास हेतु पौध रोपण सामग्री उत्‍पादित करके 80 हर्बल नर्सरी की स्‍थापना उत्‍तर प्रदेश के 8 जनपदों में की गई।

 प्रसार

    अ.    चन्‍द्रशेखर आजाद कृषि विश्‍वविद्यालय, कानपुर

(1) तकनीकी हस्‍तांतरण हेतु 5 कृषि विज्ञान केन्‍द्रों तथा 9 कृषि ज्ञान केन्‍द्रों की स्‍थापना की गई है जिससे किसानों को विकसित तकनीक के प्रयोग की व्‍यावहारिक जानकारी दी जा रही है।

(2) कृषि योग्‍य व्‍यर्थ भूमियों में खेती किये जाने से संबंधित राष्‍ट्रीय स्‍तर पर संगोष्‍ठी का आयोजन किया गया।

(3) प्रत्‍येक माह में कृषक वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम आयोजित किया जाता है।

   ब.    नरेन्‍द्र देव कृषि विश्‍वविद्यालय, कुमारगंज, फैजाबाद

(1) विश्‍वविद्यालय में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद् के सहयोग से जनपद बहराईच, बस्‍ती, वाराणसी, मऊ तथा बलिया में कृषि विज्ञान केन्‍द्रों की स्‍थापना की गई तथा प्रदेश सरकार के वित्‍त पोषण से 10 कृषि ज्ञान केन्‍द्रों की स्‍थापना की गई।

(2) विश्‍वविद्यालय का प्रसार निदेशालय, फैजाबाद, गोरखपुर, आजमगढ़, बस्‍ती, देवीपाटन एवं वाराणसी मंडल के जनपदों में बहुमुखी विकास के लिए शोध के नवीनतम परिणामों को ग्रामों में तीन प्रमुख सेवाओं क्रमश: प्रक्षेत्र सलाहकारी, तकनी‍की प्रशिक्षण एवं सूचना तथा संचार के माध्‍यम से किसानों तक पहुंचाने के लिए महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

उत्‍तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के प्रमुख कार्य

    प्रदेश के कृषि विश्‍वविद्यालय तथा कृषि विभाग एवं कृषि से संबंधित अन्‍य विभागों के कृषि सं‍बंधी अन्‍य शोध एंव शिक्षण में समन्‍वय स्‍थापित करने, शोध कार्य और उपलब्‍ध संबंधित संसाधनों में समरसता स्‍थापित करने, और उनकी उपलधियों को क्षेत्रीय असंतुलन की समाप्ति का समीकरण बनाने और शोध, प्रसार एवं शिक्षण का समुचित अधिकाधिक लाभ प्रदेश की कृषि को उपलब्‍ध कराने के उद्देश्‍य से प्रतिपूर्ति के लिए उत्‍तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद की स्‍थापना जुलाई 1989 में की गयी।

उत्‍तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के प्रमुख कार्य

1. प्रदेश के कृषि विश्‍वविद्यालयों तथा कृषि विभाग एवं कृषि से संबंधित अन्‍य विभागों के बीच तालमेल एवं समन्‍वय स्‍थापित करना।

2.‍ कृषि, शिक्षा का स्‍तर ऊंचा करना जिसमें समान्‍य विश्‍वविद्यालयों से जुडे़ महाविद्यालयों के सर्वांगीण विकास हेतु उपाय सुझाना।

3. शोध गैप की भरपाई हेतु परिषद की शोध निधि के अन्‍तर्गत परियोजनाएं स्‍वीकृत कर उनके संचालन मे योगदान करना।

4. देश में वैज्ञानिक खेती के प्रोत्‍साहन हेतु परियोजनाएं चलाना।  

5. कृषि विविधीकरण परियोजन एवं ऊसर भूमि से संबंधित विश्‍व बैंक द्वारा पोषित परियोजनाओं मे अनुसंधान एवं तकनीकी घटक को क्रार्यान्वित कराना।  

6. विषयावार प्रदेश में कृषि अनुसंधान की प्रथामिकताओं के निर्धारण के लिए स्‍ट्रेटजिक रिसर्च एण्‍ड एक्‍सटेन्‍शन प्रोग्राम तथा वैज्ञानिक संबंधी गोष्ठियों एवं कार्यशालाओं का आयोजन करके कृषि में उत्‍पादकता बढा़ने हेतु शोध परियोजनाओं के विश्‍वविद्यालय तथा अन्‍य संस्‍थाओं द्वारा संचालित करवाना एंव उनका निरिक्षण कराना।  

7. आई0 पी0 एम0 तथा आर्इ0 पी0 एन0 एम0 जैसी नवीनतम वैज्ञानिक पद्वातियों हेतु प्रदेश के लिए शोध आधारित रणनीति एवं कार्यक्रम बनाना तथा उनका निरिक्षण करना।  

8.‍ कृषि से संबंधित शासन की नीति निर्धारण में योगदान देना।